हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण करते स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण।
रिपोर्टर (अमन खान)
हरिद्वार । देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पतंजलि योगपीठ में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पतंजलि योगपीठ के परमाध्यक्ष एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव तथा पतंजलि योगपीठ के महामंत्री एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने पतंजलि वेलनेस, पतंजलि योगपीठ-2 स्थित योगभवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर दोनों ने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन हुआ। राष्ट्रगीत के दौरान पतंजलि योगपीठ परिसर का वातावरण देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत नजर आया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त किया और देश की स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष एवं बलिदानों को याद किया।
कार्यक्रम में स्वामी रामदेव जी ने कहा कि लाखों वीर-वीरांगनाओं ने शहादत देकर भारत माता को आजादी दिलवाई, अब हमारा कर्तव्य है कि हम इस देश को सम्पूर्ण विश्व की श्रेष्ठतम आर्थिक, आध्यात्मिक, राजनैतिक महाशक्ति के रूप में खड़ा करने के लिए भूमिका निभाएँ। देश केवल कुछ राजनैतिक पार्टियों, सत्ता पर काबिज लोगों, पी.एम., सी.एम., एम.पी., एम.एल.ए. का ही नहीं अपितु 145 करोड़ भारतवासियों का है। जो अधिकार और कर्तव्य देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के हैं, उतने ही ऊँचे कर्तव्य और अधिकार इस देश के प्रत्येक नागरिक के भी हैं। इसको कहते हैं स्वतंत्रता। ये अधिकार हमारा संविधान देता है।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में स्वामी रामदेव ने कहा कि देश किसी एक राजनीतिक दल या कुछ राजनीतिक पार्टियों का नहीं है, बल्कि यह देश 145 करोड़ भारतवासियों का है। उन्होंने देश के नागरिकों से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। स्वामी रामदेव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल ध्वजारोहण और समारोह तक सीमित रहने वाला अवसर नहीं है। यह दिन देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने और वर्तमान पीढ़ी को अपने दायित्वों के प्रति जागरूक करने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में प्रत्येक नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत की शक्ति उसकी विशाल जनसंख्या के साथ-साथ उसकी विविधता, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता में भी निहित है। ऐसे में देशहित को सर्वोपरि रखते हुए नागरिकों को अपने स्तर पर सकारात्मक योगदान देना चाहिए।
स्वामी जी ने कहा कि हमारा स्वप्न है स्वस्थ, समृद्ध, संस्कारवान, परम वैभवशाली, विकसित भारत का निर्माण। इसके लिए 145 करोड़ लोगाें को सामूहिक रूप से पुरुषार्थ करना पड़ेगा। दुर्भाग्य से सड़कों से लेकर संसद तक आज घृणा व नफरत का वातावरण बना है। धिक्कार है उन लोगों को जो भारत के नागरिकों के नाम पर एक-दूसरे से घृणा करते हैं, राजनैतिक व जातीय तौर पर नफरत करते हैं। बाह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, दलित, आदिवासी, वनवासी, हिन्दु, मुसलमान, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध एक-दूसरे के सामने ऐसे बैर-विरोध के साथ खड़े हैं जैसे एक-दूसरे के खून के प्यासे हों। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश के लोग ये संकल्प लें कि हमें ये घृणा व नफरत की दीवारें तोड़नी होंगी।
राष्ट्रगीत के साथ गूंजा पतंजलि योगपीठ परिसर
ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। राष्ट्रगीत के दौरान पूरा परिसर राष्ट्रप्रेम के भाव से भर गया। उपस्थित लोगों ने राष्ट्रीय ध्वज को सम्मान दिया और स्वतंत्रता दिवस की भावना के साथ कार्यक्रम में सहभागिता की। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय पर्व की गरिमा के अनुरूप देशभक्ति का वातावरण दिखाई दिया। ध्वजारोहण के बाद देश की एकता, अखंडता और समृद्धि की कामना की गई। पतंजलि योगपीठ में हर वर्ष राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार भी 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण कार्यक्रम के माध्यम से देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

स्वामी रामदेव जी ने कहा कि स्वतंत्र का अर्थ है अपना तंत्र, अपनी शिक्षा, अपनी चिकित्सा, अपनी अर्थव्यवस्था, अपने देश के नागरिकों का सम्मान व स्वाभिमान सर्वोपरि हो। उन्होंने कहा कि बच्चे और युवा आपस में न लड़ें, जैन-जेड भी आपस में लड़ने वाले या सड़कों पर अराजकता और अनार्की फैलाने वाले नहीं हों। हमें अपने अधिकारों के लिए भी लड़ना है, और अपने कर्तव्यों का पालन भी करना है लेकिन अपने लोकतांत्रिक, संवैधानिक और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखते हुए।
र्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान देने वाले सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को भी याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि देश की स्वतंत्रता अनेक लोगों के त्याग और संघर्ष का परिणाम है। आजादी हासिल करने के लिए देशवासियों ने लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों का सामना किया। स्वतंत्रता दिवस नई पीढ़ी को उस इतिहास से परिचित कराने का भी अवसर है, जिसके कारण आज देशवासी स्वतंत्र वातावरण में अपने अधिकारों का उपयोग कर पा रहे हैं। लोकतंत्र और संविधान की भावना को मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने देशवासियों से समाज और राष्ट्र के हित में सकारात्मक सोच के साथ कार्य करने का संदेश दिया।
आचार्य बालकृष्ण के संबोधन का प्रमुख संदेश अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन से जुड़ा रहा। लोकतंत्र में नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें यह भी समझना चाहिए कि समाज और राष्ट्र के प्रति उनकी कुछ जिम्मेदारियां हैं। कानून का पालन करना, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, पर्यावरण के प्रति जागरूक रहना, सामाजिक सौहार्द बनाए रखना और अपने कार्य को जिम्मेदारी के साथ करना ऐसे दायित्व हैं, जिनके माध्यम से प्रत्येक नागरिक राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकता है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस तरह का संदेश विशेष महत्व रखता है, क्योंकि देश की स्वतंत्रता केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिकता की भावना से भी जुड़ी है।
भारत की युवा आबादी को राष्ट्र की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कार्यक्रम में युवाओं की सकारात्मक भूमिका पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, योग, स्वास्थ्य, रोजगार, तकनीक और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों में युवा अपनी क्षमता का उपयोग कर देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं। पतंजलि योगपीठ की ओर से आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रप्रेम के साथ सामाजिक और नागरिक जिम्मेदारियों को जोड़ने का प्रयास किया गया। वक्ताओं ने देशवासियों से अपनी क्षमताओं का उपयोग समाज के हित में करने का आह्वान किया। स्वामी रामदेव ने देश को सभी नागरिकों का साझा राष्ट्र बताते हुए एकता की भावना को मजबूत करने की बात कही। उनका कहना था कि भारत की शक्ति उसकी जनता में है और देश के विकास के लिए सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है।
स्वतंत्रता दिवस पर दिया राष्ट्रहित का संदेश
पतंजलि योगपीठ में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का समापन राष्ट्रप्रेम और जिम्मेदार नागरिकता के संदेश के साथ हुआ। ध्वजारोहण, राष्ट्रगीत और संबोधन के माध्यम से देश की स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित किया गया। स्वामी रामदेव ने जहां देश को सभी भारतवासियों का बताते हुए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रहित पर जोर दिया, वहीं आचार्य बालकृष्ण ने नागरिकों को अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहने का संदेश दिया।80वें स्वतंत्रता दिवस पर स्वामी जी ने कहा कि कुछ लोग जिनमें दुर्भाग्य से जेन-जेड बेटे और बेटियाँ दोनों ही सम्मिलित हैं, आजादी के नाम पर बीड़ी, सिगरेट, शराब के नशे में कहते हैं कि हम आजाद देश के नागरिक हैं, मेरा जीवन मेरी मर्जी। उन्होंने कहा कि मर्जी का नाम स्वतंत्रता नहीं, उच्छ्रंख्लता है। हम ऋषि-ऋषिकाओं व वीर-वीरांगनाओं के वंशधर हैं। ऋषियों का ऋषित्व, देवों का देवत्व, वीरों का वीरत्व, राम का रामत्व, कृष्ण का कृष्णत्व, शिव का शिवत्व हमारे भीतर होना चाहिए।
स्वामी जी ने कहा कि आज विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, मीडिया, शिक्षा, चिकित्सा आदि अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ लोग बेईमान और भ्रष्ट हैं। जिन वीर-वीरांगनाओं व ऋषि-ऋषिकाओं की शहादत की बदौलत यह देश आजाद हुआ, वह उनके प्रति कृतघ्नता व अपमान कर रहे हैं। स्वामी जी ने आह्वान किया कि आजादी की 80वीं वर्षगांठ पर हम सब संकल्प लें कि राजनैतिक आजादी तो हमने पा ली है किंतु आर्थिक आजादी प्राप्त करना अभी शेष है। ईस्ट इण्डिया कम्पनी जैसी कुछ मुट्ठीभर विदेशी कम्पनियों ने हमारे देश से 100 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की लूट की। शिक्षा, चिकित्सा, आर्थिक, वैचारिक व सांस्कृतिक गुलामी तथा आपसी भेद अभी भी जारी हैं।
आचार्य जी ने कहा कि स्वामी जी ने पतंजलि से आज यह अभियान शुरू किया है कि जैसे अलग-अलग धर्म व परम्पराओं को मानने वाले लोग अपने धार्मिक पर्वों पर उपवास रखते हैं, वैसे ही राष्ट्रीय त्यौहारों जैसे- गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस आदि पर भी हम उपवास रखें। उपवास के माध्यम से जब हम राष्ट्रीय पर्वों को मनाएँगे तो हमारी बुद्धि व मन:स्थिति ठीक होगी, हम सोचने लगेंगे कि हमसे क्या त्रुटियाँ हो रही हैं, और उन त्रुटियों को सुधारने हेतु हमें क्या करना है।
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