हरिद्वार में आयोजित राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह में खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया।
रिपोर्टर (अमन खान)
हरिद्वार। जिले में तीन दिवसीय राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न खेल विधाओं से जुड़े खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल शिक्षकों और अन्य खेल प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। समारोह के दौरान भारत के महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आयोजकों ने खेलों के प्रति युवाओं को प्रोत्साहित करने और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन डिस्ट्रिक्ट वुशु एसोसिएशन, डायनेमिक स्पोर्ट्स एकेडमी मिस्सरपुर और जन अधिकार अभियान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। समारोह के दौरान फुटबॉल, एथलेटिक्स, वुशु, जूडो-कराटे और क्रिकेट सहित विभिन्न खेलों से जुड़े खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम में खेल क्षेत्र में योगदान देने वाले खिलाड़ियों, खेल शिक्षकों और कोचों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि खेल केवल शारीरिक फिटनेस का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इससे अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना का भी विकास होता है।
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर समारोह में महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को विशेष रूप से याद किया गया। वक्ताओं ने उनके खेल जीवन और देश के लिए किए गए योगदान को प्रेरणादायी बताया। कार्यक्रम में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए युवाओं से उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया। भारत में हर वर्ष 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। इस दिन खेलों और खिलाड़ियों के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
हरिद्वार में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम में भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों का उत्साह बढ़ाया गया। समारोह में मौजूद लोगों ने कहा कि स्थानीय स्तर पर खेल प्रतिभाओं को मंच मिलने से युवाओं को अपनी क्षमता प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। समारोह के दौरान अलग-अलग खेल विधाओं में सक्रिय खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया। फुटबॉल, एथलेटिक्स, वुशु, जूडो-कराटे और क्रिकेट से जुड़े खिलाड़ियों ने कार्यक्रम में अपनी भागीदारी दर्ज कराई।
खेल शिक्षकों और कोचों को भी उनके योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। आयोजकों का कहना है कि किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके अभ्यास और मेहनत के साथ-साथ प्रशिक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए समारोह में खिलाड़ियों के साथ उनके मार्गदर्शकों को भी सम्मान देना कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। सम्मान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों ने इस पहल को उत्साह बढ़ाने वाला बताया। उनका कहना था कि इस तरह के आयोजनों से खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन में और सुधार करने की प्रेरणा मिलती है।
समारोह में युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए खेलों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। नियमित खेल गतिविधियों से शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती और अनुशासन विकसित करने में भी मदद मिलती है। कार्यक्रम में मौजूद आदेश चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खेलो इंडिया जैसे प्रयास खिलाड़ियों को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को बेहतर स्तर पर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में खेलों को लेकर सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ है और युवाओं को अपनी रुचि के अनुसार खेलों में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से नियमित अभ्यास करने और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी खेल में बेहतर प्रदर्शन के लिए अनुशासन और निरंतर अभ्यास जरूरी है।
स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने की अपील
समारोह के दौरान युवाओं और खिलाड़ियों को स्वामी विवेकानंद के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश भी दिया गया। आदेश चौहान ने कहा कि युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहना चाहिए और कठिन परिस्थितियों में भी प्रयास जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं को आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देता है। खिलाड़ियों के लिए भी ये गुण महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि खेल के क्षेत्र में सफलता हासिल करने के लिए निरंतर अभ्यास के साथ मानसिक मजबूती की आवश्यकता होती है।
कार्यक्रम में युवाओं को खेलों के साथ शिक्षा और व्यक्तित्व विकास पर भी ध्यान देने की बात कही गई। वक्ताओं ने कहा कि खेल और शिक्षा एक-दूसरे के पूरक हैं तथा दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाकर युवा बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। हरिद्वार में आयोजित इस कार्यक्रम को स्थानीय खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया। अलग-अलग खेल विधाओं से जुड़े खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की मौजूदगी ने समारोह को व्यापक रूप दिया।
आयोजकों ने कहा कि स्थानीय स्तर पर प्रतिभावान खिलाड़ियों की पहचान और उन्हें प्रोत्साहन देना जरूरी है। कई बार प्रतिभा और मेहनत के बावजूद खिलाड़ियों को पर्याप्त मंच नहीं मिल पाता। ऐसे आयोजनों के माध्यम से खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाने और उन्हें खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा सकता है। वुशु, जूडो-कराटे और एथलेटिक्स जैसे खेलों के साथ फुटबॉल और क्रिकेट के खिलाड़ियों को भी कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इससे विभिन्न खेल विधाओं के खिलाड़ियों को एक साथ आने और एक-दूसरे से सीखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम में खिलाड़ियों के साथ कोच और खेल शिक्षकों के योगदान को भी प्रमुखता दी गई। वक्ताओं ने कहा कि किसी खिलाड़ी को बेहतर प्रदर्शन के स्तर तक पहुंचाने में प्रशिक्षक का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होता है। कोच खिलाड़ियों की तकनीक सुधारने, अभ्यास की दिशा तय करने और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके योगदान को सम्मानित करने से खेल प्रशिक्षकों का भी उत्साह बढ़ता है।
समारोह में सम्मानित किए गए कोच और खेल शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह और अंगवस्त्र प्रदान किए गए। आयोजकों ने कहा कि खेलों के विकास के लिए खिलाड़ियों के साथ प्रशिक्षकों को भी उचित सम्मान और प्रोत्साहन मिलना जरूरी है। तीन दिवसीय राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह के माध्यम से हरिद्वार में खेल संस्कृति को मजबूत करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में विभिन्न आयु वर्ग और खेल विधाओं से जुड़े लोगों की सहभागिता रही।
वक्ताओं ने कहा कि खेलों को केवल प्रतियोगिता के रूप में नहीं देखना चाहिए। खेल व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टीम खेलों से सहयोग और नेतृत्व की भावना विकसित होती है, जबकि व्यक्तिगत खेलों से आत्मअनुशासन और आत्मविश्वास मजबूत होता है। कार्यक्रम में मौजूद खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
समारोह ने बढ़ाया खिलाड़ियों का उत्साह
तीन दिनों तक चले इस आयोजन का समापन खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों के सम्मान के साथ हुआ। समारोह में खेलों के प्रति युवाओं की रुचि बढ़ाने, स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। आयोजकों ने कहा कि भविष्य में भी खेल गतिविधियों और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे। उद्देश्य यही है कि हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों के युवा खेलों के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ा सकें और जिला, राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
राष्ट्रीय खेल दिवस समारोह के दौरान खिलाड़ियों को सम्मानित किए जाने से उनमें नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि खेल प्रतिभाओं को उचित मंच और प्रोत्साहन मिलने पर वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर कर सकते हैं। इस अवसर पर मेजर ध्यानचंद के खेल योगदान को याद करते हुए युवाओं से खेलों को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की गई। समारोह के माध्यम से खिलाड़ियों, कोचों और खेल शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के साथ ही युवाओं को मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश दिया गया।
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