मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खटीमा स्थित अपने खेत में टिलर चलाकर जुताई करते हुए। इस दौरान उन्होंने जैविक खेती, प्राकृतिक कृषि और किसानों के परिश्रम के महत्व पर जोर दिया।
खटीमा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बार फिर अपनी सादगी और कृषि से जुड़े अपने गहरे लगाव का परिचय देते हुए सोमवार को खटीमा स्थित अपने निजी आवास नगला तराई के खेत में स्वयं टिलर चलाकर खेत की जुताई की। इस दौरान उन्होंने खेत में गोबर की प्राकृतिक खाद भी डाली और प्रदेशवासियों को जैविक एवं पारंपरिक खेती अपनाने का संदेश दिया। मुख्यमंत्री के इस कदम को किसानों के प्रति सम्मान और कृषि संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री के साथ उनकी माता श्रीमती बिशना देवी भी खेत में मौजूद रहीं। खेत में काम करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों के परिश्रम, संघर्ष और देश की अर्थव्यवस्था में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी मेहनत के बल पर ही देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन का आधार है। भारत की पहचान सदियों से कृषि प्रधान देश के रूप में रही है और आज भी करोड़ों लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर है। ऐसे में खेती और किसानों को मजबूत बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ-साथ पारंपरिक और प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को भी संरक्षित रखना जरूरी है। जैविक खेती न केवल भूमि की उर्वरता को बनाए रखती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक खेती मिट्टी को स्वस्थ रखने में मदद करती है। मुख्यमंत्री ने खेत में गोबर की खाद डालते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। गोबर की खाद जैसी पारंपरिक विधियां मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार करती हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाएं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आधुनिक उपकरण, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक सुंदरता, ग्रामीण संस्कृति और कृषि परंपराओं से जुड़ी हुई है। प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक खेती लंबे समय से जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। सरकार स्थानीय उत्पादों, बागवानी, औषधीय पौधों और प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चला रही है ताकि किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ना बेहद जरूरी है। कई युवा रोजगार की तलाश में गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं, जबकि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। यदि आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ खेती की जाए तो यह लाभकारी व्यवसाय बन सकती है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं चला रही है, जिनका उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाना, किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि किसानों और सरकार के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
मुख्यमंत्री के खेत में उतरकर स्वयं जुताई करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के इस संदेश की किसानों और आम लोगों ने सराहना की है। लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह कदम किसानों के प्रति सम्मान और कृषि संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में प्रेरणादायक है। इससे किसानों का मनोबल बढ़ेगा और जैविक खेती के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री का यह संदेश केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण विकास की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। उनके इस प्रयास से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार कृषि और किसानों के विकास को लेकर गंभीर है तथा भविष्य में भी इस दिशा में निरंतर कार्य करती रहेगी।
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