सोशल मीडिया पर वायरल एलएसी से जुड़े वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक भारतीय सेना या सरकारी एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है।
नई दिल्ली भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। वायरल वीडियो में कथित तौर पर भारतीय सेना और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवान शांत और सामान्य माहौल में दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ चीनी सैनिक बॉलीवुड फिल्म “मोहब्बतें” के लोकप्रिय गीत “आंखें खुली हों या हों बंद” को मोबाइल फोन पर सुनते और गुनगुनाते नजर आते हैं, जबकि दूसरी ओर मौजूद एक भारतीय सैनिक इस दृश्य को रिकॉर्ड करता दिखाई देता है।
हालांकि, इस वीडियो की तिथि, स्थान और प्रामाणिकता की अभी तक भारतीय सेना, रक्षा मंत्रालय या किसी अन्य सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए वीडियो से जुड़े किसी भी दावे को सत्यापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ भी ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करने की सलाह देते हैं। यह वीडियो सबसे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) अकाउंट से साझा किया गया। पोस्ट में दावा किया गया कि यह दृश्य एलएसी के किसी क्षेत्र का है, जहां भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच कुछ सौहार्दपूर्ण पल देखने को मिले। हालांकि यह दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है और संबंधित पोस्ट में भी किसी आधिकारिक स्रोत का उल्लेख नहीं किया गया।
वीडियो में पहाड़ी क्षेत्र के बीच दोनों देशों के सैनिक अलग-अलग स्थानों पर बैठे दिखाई देते हैं। कुछ सेकंड के इस वीडियो में किसी प्रकार का तनावपूर्ण माहौल नजर नहीं आता, बल्कि कथित रूप से चीनी सैनिक हिंदी फिल्म का गीत सुनते दिखाई देते हैं। इसी कारण यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे भारत और चीन के सैनिकों के बीच मानवीय पहलू से जोड़कर देखा, जबकि कई लोगों ने वीडियो की सत्यता पर सवाल उठाए।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और तस्वीरों को बिना आधिकारिक पुष्टि के अंतिम सत्य नहीं माना जाना चाहिए। कई बार पुराने वीडियो नए दावों के साथ साझा किए जाते हैं या फिर उनके स्थान और समय को लेकर भ्रम पैदा हो जाता है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विश्वसनीय सरकारी या सैन्य स्रोतों से पुष्टि आवश्यक होती है। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब हाल के दिनों में चीन की सैन्य गतिविधियों को लेकर भी कई रिपोर्टें चर्चा में रही हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और वाणिज्यिक उपग्रह तस्वीरों के आधार पर यह दावा किया गया कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा से लगभग 250 किलोमीटर दूर स्थित अपने दो वायुसेना अड्डों पर जे-20 स्टेल्थ लड़ाकू विमान तैनात किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार शिनजियांग के होतान एयरबेस और तिब्बत के डामशुंग एयरबेस पर ऐसे विमानों की मौजूदगी का दावा किया गया है।
हालांकि इन उपग्रह तस्वीरों और उनसे जुड़े दावों की भी किसी भारतीय सरकारी एजेंसी या रक्षा मंत्रालय द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए रक्षा विशेषज्ञ इन रिपोर्टों को भी सावधानीपूर्वक देखने की सलाह दे रहे हैं। भारत और चीन के बीच एलएसी पर पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ताएं हुई हैं। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव कम करने तथा शांति बनाए रखने के उद्देश्य से विभिन्न स्तरों पर बातचीत जारी रखी है। समय-समय पर सैन्य कमांडरों की बैठकें और राजनयिक संवाद भी आयोजित होते रहे हैं ताकि सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़े किसी भी वीडियो या दावे का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए मीडिया संस्थानों और आम नागरिकों दोनों की जिम्मेदारी है कि वे केवल सत्यापित जानकारी पर भरोसा करें और अपुष्ट दावों को तथ्य के रूप में साझा करने से बचें। डिजिटल युग में किसी भी वीडियो के वायरल होने की गति तेज होती है, लेकिन उसकी सत्यता की जांच करना भी उतना ही आवश्यक है।
फिलहाल वायरल वीडियो को लेकर न तो भारतीय सेना और न ही चीन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इसी प्रकार वीडियो में दिखाई गई परिस्थितियों, स्थान और समय की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस वीडियो को केवल सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वायरल सामग्री के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी आधिकारिक घटनाक्रम के प्रमाण के रूप में। जब तक संबंधित सरकारी एजेंसियों या सैन्य अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होती, तब तक इस वीडियो और इससे जुड़े दावों पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े विषयों पर केवल आधिकारिक एवं सत्यापित जानकारी को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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